Sunday, August 28, 2016

जीवन यही और उसके रंग

हर कश्ती पे बांधे सपने मेरे
और चाँद का ज्वार उसके विपरीत
जीवन यही और उसके रंग
ना कश्ती छूटे, ना चाँद से रूठें

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