Friday, December 2, 2016

चेहरा

अब ये शहर अजनबी नहीं लगता
किसी अंधेरी गली में दिल नहीं बैठता
सारे चेहरे देखे से लगते हैं
अब मन भीड़ में वो एक चेहरा नहीं खोजता

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