शब्दों से शब्द मिले,
और मिले खनकते तारों से,
तो बन पड़े गीत निराले,
गीतों से गीत मिले,
तो अविरल चल पड़ी गीतमाला,
बन पड़ी सफ़र की धारा,
एक पैर पे नाचा बंजारा,
भुला तृष्णा जो फ़क़ीरे ने खनका एक तारा,
गीतों से द्वेष मिटे, गाँव मिले,
जब गूँज पड़े क्या मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा,
गीतों में रिश्तों की कुंजी,
नन्हें, गीतों से जाने माँ की परिभाषा,
दम भर के गीतों का ताल मिलाके,
टूकड़ि करती ना वहम ज़रासा,
गीतों से पंख पाती अभिलाषा,
क़दमों को मिलता उद्देश्य नया सा,
उत्सव गीत से, उल्लास गीत से,
गीतों के परिणय से अभिव्यक्त होती जीवन की गाथा
Nice avi..:) keep it up!!
ReplyDeleteVery nice lines. Keep it up.
ReplyDeleteबहुत खूब बहुत सुन्दर कविता लिखी है । ईश्वर तुम्हारी लेखनी को और अधिक सशक्त बनाये ।आशिर्वाद
ReplyDeleteबहुत खूब बहुत सुन्दर कविता लिखी है । ईश्वर तुम्हारी लेखनी को और अधिक सशक्त बनाये ।आशिर्वाद
ReplyDeleteBeautiful Poetry, simple words well connected with deep meaning
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