storywaalaa
Sunday, February 15, 2015
कहानी
क़दमों की लिखावट
सागर के सिरहाने
कहने चले एक शाम की कहानी
बनती जैसे क़दम मिलते जाते
ना शुरू ना अंत
बस बीच का कुछ
लहरें मिटाती
क़दम बनाते
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