storywaalaa
Thursday, February 12, 2015
रोज़ाना
साँझ डूब जाती है हर रात युहीं
कुछ भी बदलता नहीं मंज़र यहाँ
रात का एक रंग और ढंग रोज़ाना
लिहाफ में कल को सिमट के सो जाना
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