डोर के आखिरी छोर से,
किसी रिश्ते से तो हैं बंधे,
नाम नहीं इसका कोई तो चलो जादू ही कहदें,
मनो या न मनो ये तुमपे
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हवा से कदम मिला के चलने लगी,
लहरों से मिलकर तैरने लगी,
ज़िन्दगी के उलझे मांझे
सुलझने लगे, ये पतंग उड़ने लगी,
किसी रिश्ते से तो हैं बंधे,
नाम नहीं इसका कोई तो चलो जादू ही कहदें,
मनो या न मनो ये तुमपे
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हवा से कदम मिला के चलने लगी,
लहरों से मिलकर तैरने लगी,
ज़िन्दगी के उलझे मांझे
सुलझने लगे, ये पतंग उड़ने लगी,
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