Thursday, September 17, 2015

झूठ

शाम से कहदो ना और क़दम बढ़ाए रात का ख़ौफ़ है बस ठहर जाए झूठ बड़े सफ़ेद कहे हमने दिन सारा रात इतनी काली कि सब निखर के आए

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