चल माटी के सत्तू फिर बनायें,
माचिस की डिब्बियों से ट्रेन बनायें,
साइकिल की रेस लगायें,
कूद फांद के पतंग लूट के लायें,
अम्मा डाटें तो खिलखिलाएं,
टूटे दाँतों के किस्से सुनाएँ,
किताब खुले तो ऊंघ लगायें,
छुप छुप के बर्फी खाएं...
माचिस की डिब्बियों से ट्रेन बनायें,
साइकिल की रेस लगायें,
कूद फांद के पतंग लूट के लायें,
अम्मा डाटें तो खिलखिलाएं,
टूटे दाँतों के किस्से सुनाएँ,
किताब खुले तो ऊंघ लगायें,
छुप छुप के बर्फी खाएं...
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