Friday, January 22, 2016

जीवनी

आया तूफ़ान टूटा मकान उड़ गयी छत बह गए बाग़ रह गयी नीवें और उम्मीदें रेत के टीले और उनपर नए पौधे उनमें से एक बना मैं बोला बरगद बच्चों से