बह रहा हे तो बह जाने दो
ये रगो में कौन्धता रक्त ज्वार बनके
उकलता हे तो उद्देश्य बन जाने दो
सवालों को मत झानो
इन्हें मशाल बन जाने दो
दर्द अगर स्वर बने तो कविता बनने दो सपनों को अगर गती मिले तो अभियान बनने दो अविरल जो धारा मिले ओर कश्ती विचारों की बहती हे तो बह जाने दो
चाहा हे अगर तो भय कैसा उठाओ कुंची और रंग डालो हर कोइ यहाँ झिझक रहा हे ये प्रकृति अब बदल डालो
बह रहा हे तो बह जाने दो
दर्द अगर स्वर बने तो कविता बनने दो सपनों को अगर गती मिले तो अभियान बनने दो अविरल जो धारा मिले ओर कश्ती विचारों की बहती हे तो बह जाने दो
चाहा हे अगर तो भय कैसा उठाओ कुंची और रंग डालो हर कोइ यहाँ झिझक रहा हे ये प्रकृति अब बदल डालो
बह रहा हे तो बह जाने दो