बड़े बदनसीब हैं ये नज़ारे जो तुम्हे देख नहीं पाते,
कैसी होती है पहाड़ों से झूमती रौशनी ,
पानी की चादरों पे बिखरती ज़िन्दगी,
मेरी आँखों में सिमट के करवट लेती ख़ुशी ,
मस्त हवाओं में खेलती ज़िन्दगी,
क्या समंदर, क्या लहलहाते बागान,
बारीक पगडंडियों से मिलता आसमान,
बड़े बदनसीब हैं ये नज़ारे जो तुम्हे देख नहीं पाते,
जाने किस ऐठ में आँखें दिखाते,
बेपरवाह हसने पे मौसम बदल जाते,
पलकों के ढलते दिन बदल जाते,
देखा है हमने ज़मीं पे सितारे,
बड़े बदनसीब हैं ये नज़ारे जो तुम्हे देख नहीं पाते ...
कैसी होती है पहाड़ों से झूमती रौशनी ,
पानी की चादरों पे बिखरती ज़िन्दगी,
मेरी आँखों में सिमट के करवट लेती ख़ुशी ,
मस्त हवाओं में खेलती ज़िन्दगी,
क्या समंदर, क्या लहलहाते बागान,
बारीक पगडंडियों से मिलता आसमान,
बड़े बदनसीब हैं ये नज़ारे जो तुम्हे देख नहीं पाते,
जाने किस ऐठ में आँखें दिखाते,
बेपरवाह हसने पे मौसम बदल जाते,
पलकों के ढलते दिन बदल जाते,
देखा है हमने ज़मीं पे सितारे,
बड़े बदनसीब हैं ये नज़ारे जो तुम्हे देख नहीं पाते ...