कोई हवाबाज़ी के रंग उढ़ेल रहा है
कोई वादों के रंग घोल रहा है
कोई खुद को मस्त कलंदर बोल रहा है
ये चुनावों की होली है, हर कोई बुरा ना मानो बोल रहा है
आरोपों कि पिचकारी छूट रही है
लांछन कि पिस्टल भी छूट रही है
दे मारा किसी ने चरित्र पे गुब्बारा, अब लीपा पोती हो रही है
ये चुनावों की होली है, जोड़ तोड़ कि गुलाल उड़ रही है
काहे कि लाज लपट और ज़िम्मेदारी
आज क्या कुशासन क्या विकास और क्या बेरोज़गारी
सीटों कि भांग खूब बन पड़ी है, आज सब को सियासत चढ़ पड़ी है,
ये चुनावों कि होली है, हे नगरवासी, तू कल का मरता आज मरे, तेरी किस को पड़ी है?
परन्तु, धुप से जल चूका काला मुख देख रहा है
कोई उसके साथ ये विचित्र होली खेल रहा है
केह रहा है लाल नीला पीला हरा- सब रंग तेरे चेहरे पे लगाऊंगा
एक में ही तेरा मसीहा हूँ, तुझे दूध से नहलाऊँगा
क्षमा करना हे राजनीति के ज्ञानी,
ये चुनावों की होली है और तेरी अक्ल नीरी भोली है
कब काले चेहरे पे कोई रंग चढ़ा है,
प्रचार के गुबार में तेरी आँखों में अहम् का गुलाल भरा है,
जब हुडदंग रुकेगा तब तू ये जानेगा,
मेरी एक उंगली के बल पे तेरा ये कल खड़ा है
कोई वादों के रंग घोल रहा है
कोई खुद को मस्त कलंदर बोल रहा है
ये चुनावों की होली है, हर कोई बुरा ना मानो बोल रहा है
आरोपों कि पिचकारी छूट रही है
लांछन कि पिस्टल भी छूट रही है
दे मारा किसी ने चरित्र पे गुब्बारा, अब लीपा पोती हो रही है
ये चुनावों की होली है, जोड़ तोड़ कि गुलाल उड़ रही है
काहे कि लाज लपट और ज़िम्मेदारी
आज क्या कुशासन क्या विकास और क्या बेरोज़गारी
सीटों कि भांग खूब बन पड़ी है, आज सब को सियासत चढ़ पड़ी है,
ये चुनावों कि होली है, हे नगरवासी, तू कल का मरता आज मरे, तेरी किस को पड़ी है?
परन्तु, धुप से जल चूका काला मुख देख रहा है
कोई उसके साथ ये विचित्र होली खेल रहा है
केह रहा है लाल नीला पीला हरा- सब रंग तेरे चेहरे पे लगाऊंगा
एक में ही तेरा मसीहा हूँ, तुझे दूध से नहलाऊँगा
क्षमा करना हे राजनीति के ज्ञानी,
ये चुनावों की होली है और तेरी अक्ल नीरी भोली है
कब काले चेहरे पे कोई रंग चढ़ा है,
प्रचार के गुबार में तेरी आँखों में अहम् का गुलाल भरा है,
जब हुडदंग रुकेगा तब तू ये जानेगा,
मेरी एक उंगली के बल पे तेरा ये कल खड़ा है